साना की ठुकायी की ठान ली

नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको साना की चुत के साथ हुई दीवानों की तरह मुठभेड़ को बताने जा रहा हूँ | दोस्तों साना वो लौंडिया थी जो किसी भी ऐरे - गैरे बंदे से बता तो कर लेती थी पर अपनी चुत का सौदा इतनी ज़ल्दी नहीं करती थी | यह बात मुझे किन्ही चूतिये लोगों ने बताई और बस मेरी उन से बहस हो चली की इस साना को मैं पेल कर दिखाऊंगा और अपने बात को साबित करने के लिए मैंने अपनी बात साना के आगे बढ़ाई | हम अक्सर ही रात को फोन पर बात किया करते थे जिसपर मैं मौका पाते ही रोमांटिक हो जाया करता था और वो भी शरमाते हुए मुझे सहयोग देती |

धीर – धीर मैंने अपने रोमांस को सेक्स की बातों में बदल दिया और उसके बदन के बारे में बातें करने लगा | मैं कसर ही उसे उसके बंद के साथ के अपने होठों और उँगलियों की कामुक बातों को फोन पर सुनाते हुए मस्त गरम दिया करता जिसपर वो अपने चुचों को फोन पर ही मसला दिया करती | मैं तो इसी फिरात में था की कब साना अपनी चुत को मेरे लंड का न्योता दे देगी | यह समय आने में समय ना लगा और साना ने एक दिन मुझे उसके बदन के साथ खिलवाड़ करने के लिए अपने घर को बुला लिया | घर पहुंचकर हम दोनों ने पहले खूब रोमांटिक बातें की जिस्सके बाद माहोल चुम्मा - चाटी मैं बदल गया |

मैंने अब गर्म होकर अपने भी पूरे कपड़े खोल दिया उससे लिपटते हुए साना के चुचों को मसलता हुआ पीने लगा | मैं उसके चुचों को पीते हुए उसकी पैंट के उप्पर से उसकी चुत के उप्पर खुजली करते हुए उसे कामक्रीड़ा में मोहित कर दिया | मैं वहीं लेटकर लिसा की चुत की अपने जीभ से चाटने लगा साथ ही अपनी काम्दीन उँगलियों को उसकी चुत के अंदर ऊँगली करने लगा | अब मैंने उसकी टांगों को उप्पर की ओर उठाते हुए चुत का छेद में थूक गिराकर चिकना कर अपने मोटे लंड को उप्पर मसलने लगा |

अब जब मैंने पूरी तरह जोश में आते हुए साना की चुत में अपने लंड को घुसाया तो साना की निकलती हुई सिस्कारियां मेरे हौसले को बढ़ावा देने लगी जिससे मैंने अपने लंड को अपनी रफ़्तार को बहुत ज्यादा तीव्र कर दी थी | मैं भारी झटका मारने लगा जिससे उसकी जोर की सिसकियाँ निकलने लगी | मैं उसकी चुत को चोदे जाने में कोई कमी ना चोद रहा था | कुछ ही देर में मेरे लंड का मुठ भी निकल पड़ा साना की चुत में ही निकल पड़ा | मैं उसकी चुत के भी कामरस को बहार निकालने के लिए अपनी ऊँगली अंदर – बहार करनी बंद ना की जिससे उसका कामरस भी मेरे सामने बह गया और जिसे मैंने पल में ही अपने मुंह में भर लिया और मेरी मुस्कान ने मेरे तर्कों को साबित कर दिया सभी के सामने |