नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको नीतू की भरकम चुदाई के बारे में बताने जा रह हूँ जोकि मेरी मालकिन की बहु लगती थी | दोस्तों मैं अपने नए शहर में किराये के मकान में रहा करता था | मेरी मालकिन के बेटी के नयी – नयी शादी हुई थी और वो नयी ही दुल्हन अपने घर में ले आया था और अपने काम में इतना व्यस्त तह की कुछ महीनो के लिए काम से बहार ही रह रहा था | अब मेरी मल्कुं की जवान बहु घर पर अकेली ही घर का काम संभाला करती थी मेरी मालकिन कुछ ज्यादा बीमार होने के कारण ज्यादार समय अस्पताल में रहा करती थी | अब काफी समय मुझे उसके बहु के साथ बिताने के लिए मिल जाया करता था | मेरी निगाहें हमेशा ही उसके कोमल बदन को निहारा करती थी जिसकी खबर उसे भी अच्छी ही तरह से थी |
मैं अब उससे खुलकर घर में बातें भी किया करता और उसकी जवानी और उसकी सुंदरता पर खुलकर तारीफ़ भी करता था जिसपर वो हमेशा शर्मा जाती थी | एक दिन मैंने आगे बढते हुए अपने सारे जस्पतों की सीमा को उलांघ दिया और नीतू को घर में हसाम के वक्त अकेले में देखते हुए उसे जाकर पीछे से अपनी बाहों में भरकर चूमने लगा | उसके चुचों के अपनी दो उँगलियों से से मसल रहा था जिसपर वो शर्माने लगी पर उसने मुझे कतई भी नहीं रुका आखिर अपनी तंग जवानी के मज़े में वो अपने आप को रोक भी कैसे पाती | मैंने उसे अपनी बाहों में भरते हुए उसके होठों को चूसने लगा और साथ ही नीचे से उसकी चुचियों को दबाने लगा |
धीरे - धीरे मैंने अब उसकी साडी के पल्लू को गिराते हुए उसके तन बंद को अपने सामने नगन करते हुए उतार दिया और उसके लटके चुचों को को चूसने लगा | मैंने नंगी पड़ी नीतू को अब अपनी बाहों में उठाकर उसके कमरे में लिटा दिया और फिर अपनी उँगलियों से उसकी चिकनी चुत रगड़ने लगा जिपर उसकी सीत्कारें को सुनते ही मेरा लंड सातवें आसमान पर छड गया | मैंने अब उसकी चुत में उंगलियां अंदर - बाहर कर रहा था कुछ ही देर में उसकी टांगों के पंखुड़ियों को खोलते हुए अपने लंड पर थूक लगाते हुए नीतू की चुत के मुहाने में अंदर – बहार करते हुए धक्कों की रफ़्तार को तेज कर दिया |
अब वो भी अपनी चुत पर ऊँगली मसलने लगी और अपनी टांगों पूरा उप्पर को उठा दिया जिससे उसकी सांवल चुत का छेद मेरे लंड के आगे अच्छी तरह निखर चूका था | मैं भी उससे भूके कुत्ते की तरह चोदता चला गया जिसे वो अपनी आँखों बंद कर किसी अधमरी कुतिया की तरह मज़े ले रही थी | चुदाई मैंने करते समय एक पल भी नहीं गंवाय और एक समय ऐसा आय की उसकी चुत का पानी तो निकल गया पर मैंने लंड के मुठ की पिचकारी भी उसके बदन पर पड़ गयी | मैंने संतुष्ठी में उसके बदन को अपने होंठों से बारी – बारी चूमा जिसपर वो मेरे लंड को अपनी चुत की मलाई से मसल रही थी | मैंने जब तक अपने आप को उस किराए मकान में हर दिन अपनी मालकिन की बहू नीतू के बदन के साथ इस तरह नाजायज़ सम्बन्ध बनाये रखे |