मोहल्ले की पाली रांड

नमस्कार दोस्तों,

आज मैं रजनीकांत अपनी मस्तानी चुदाई का किस्सा सुनाने जा रह हूँ और उम्मीद करता हूँ की आप भी मस्त में उत्तेजित हो उठेंगे | मेरी मुलकात यूँही अपनी इमारत के नीचे अपने मोहल्ले में घूमते हुए ही उससे हुई थी | उसका गिरा हुआ बटवा मुझे मिला और जब मैंने उसे लौटाया तो इसी बहाने हमारी बातें भी शुरू हो गयी | अब तो हमारी रोज मुलाकात हुआ करती और रोज हम यूँही घूमते हुए बातें किया करते थे | एक दिन जब हम अपने घर जा रहे थे उसने अचानक देखा की उसका घर बंद था और तभी मैं उसे अपने घर ले गया ताकि वो कुछ देर इन्तेज़ार करने लगे | आज पहली बार मैंने उसके उस छोकरी के उठे हुए तंग बदन की निगरानी करने का मौका मिला था |

अब मेरे घर पर टी.वि देखते – देखते बात कर रहे थे | तभी एक चैनल पर दो जोड़े सेक्स कर रहे थे और मैं अपने आप को उन्हें देख रोक ना पाया | वो भी मेरे उनकी चुदम - चुदाई को देख रही थी | मैं भी अब उसके जस्बातों को समझने लग आता | मेरे दिमाक में कुछ ख्याल आये तो मैंने उसके हाथ को के उप्पर मसलना शुरू कर दिया | वो भी मैं मस्त वाली उत्तेजित हो चुकी थी अपने जस्बातों को रोक ना पाई और मुझसे चिपककर मेरे होठो को चूमने लगी | मैं उसकी गर्दन को चुमते हुए उसके टॉप के अंदर हाथ उसे उतर दिया | मैं उसके उसके चुचों को चुमते हुए कुछ देर बैठे – बैठे ही सहलाने लगा |

कुछ देर बाद मैंने उसकी स्कर्ट को भी उतार दिया और उसे पैंटी को भी उतार अपने अंदर वाले रूम के बिस्तर पर चडा लिया | मैं उसकी पैंटी को उतार उसकी चुत को चाट रहा था | उसके चेहरे पर पर भी शर्म लाज – लज्जा का कोई नामो – निशान तक नहीं था | कुछ देर बाद मैंने अब उसे भी बिलकुल उसकी घोड़ी की मुद्रा में दिया | मैं उसे अब पीछे से घोडा बनकर उसकी चुत को चाट रहा था और साथ ही उसकी चुत में अपनी ऊँगली भी घुमा रहा था | जब मुझसे रहा ना गया तो मैंने भी कतई घोड़े के माफिक उसके पीछे चड गया और और उसके चुत पर अपने लंड को लगाते हुए झटके देने लगा | मेरे लंड के अंदर जाते ही वो जोर – जोर की चींखें लेने लगी जिससे मेरा मन अब तो उसकी और जमकर चुदाई करने का करने लगा |

मैं अब अपने हाथों से नीचे से उसके चुचों को भींचते हुए उसकी चुदाई बिलकुल अपने किसी घोड़े की तरह जमकर अपनी बाहों में जकडकर करने लगा था |हमारे मज़े का अब कोई ठिकाना ना था और वो भी घोड़ीकी तरह आंहें भरने लगी थी | उसके बदन मेरे झटकों की चोट से बिलकुल अल पड़ चूका था और हमारे मज़े में मैंने उसकी चुत पर अपने कामरस को ही छोड़ दिया |उस दिन के बाद से यूँ समझ लीजिए की मैंने अपने मोहल्ले की रांड को पाल लिया था |