प्यारे का परवान चढा

नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको अपने रिश्तेदार की बेटी की पहाड़ों पर की चुदाई के बारे में बतान एज रहा हूँ जिसे सुना आपक मन ज़रुर बासना की तेज फुन्कारों से चेह – चेहा उठेगा | दोस्तों मैं अक्सर ही अपने दोस्तों के सतह पहाड़ों की जगह पर घूमने जाया करता था जहाँ मुझे ठण्ड के मौसम में बहुत मज़ा आया करता था | इस बार हुआ यूँ की मुझे कुछ जवान लड़कियों किट ओली भी नज़र आई हमारी ही तरह घूमने के लिए वहाँ आई हुई थी | हमारा अभी बहुत लंबा सफर तह और मैं अभी उसे लड़की से बात कर पटाने की ठान ली | अगले ही कुछ पल बाद हमारी रेलगाड़ी थी पहाड़ों के लिए जहाँ पहले से उसकी सह्लियाँ और सभी दोस्त मौजूद थे |


मैं जब उस बातें करने लगा और उसे पाने बारे में बतिया रहा था इसने में ही रेलगाड़ी चल पड़ी और हमें पकड़ने का मौका ही नहीं मिला | हम दोनों बहुत परेशान हो उठे | खुशकिस्मती से मेरे पास कुछ रुपैये तो मैंने ही उनके पीछे जाने का फैसला किया | मैंने अब इसी दौरान उस लड़की के तन बंदन को भी इस्तेमाल करने का प्लान बना लिया था | हम रेलगाड़ी लेकर सही जगह पर पहुच तो गए पर अभी भी हम दोस्तों से काफी दूर थे | हम यूँही अब जंगल पार करते हुए जा रहे थे और बीच में ही हम दोनों का रोमांस उमड़ पड़ा | उसने जैसी मेरी तारीफ़ करते हुए अपने दिल की बता कही तो उसकी कमर को सहलाया जिसपर पता ही नहीं चला हम वही खड़े होकर एक दूसरे से लिपट गए | मैं अब उसकी गरदाम को बड़े ही मनमोहक तरीके से चूमने लगा |

हमारा प्यार देखते ही देखते परवान चढ़ने लगा और मेरे हाथ अब सरकते हुए सुके चुचों तक भी पहुँच चुके थे | मैंने उसकी को वहीँ एक पेड़ के पीछे ले जाते हुए उसकी कुर्ती को उतारा तो उसकी नंगे चुचों को देखकर मेरा लंड बिलकुल सख्ती में आ गया | मैंने उसके ब्रा का हुक खोलते हुए उसके चुचों को अपने हाथों में ले लिया और चूसने लगा था जैसे कोई बच्चा अपने माँ के चुचों को पीता है | अब गरम हो गयी अब मैंने उसके होठों को भी अपने होठों के तले दबाकर चूसने लगा साथ ही मेरी उँगलियाँ ने अब उसकी पैंटी को उतार दिया | कुछ ही देर में उसकी चुत में ऊँगली कर रहा था और जिसपर उसने वहीँ खड़े हुए ही अपनी दोनों टांगों के परदों को खोल दिया था | मैंने उस पेड़ के पीह्क ही घास में लिटा दिया जिससे उसकी पिलपिली चुत का द्वार मेरे करीब आ गया और मुझे उसमें अपने लंड को भी अंदर तीव्रता से पेलने में संकोच नहीं हो रहा था |

मैं उसकी चुत में अपने लंड को देने लगा तह और साथ ही दोनों एक दूसरे से मेल – मिलाप करते हुए गर्म – आहें ले रहे थे जिससे हमारी शारीरिक गर्मी में कुछ ज्यादा की वासना की परछाई सी छा गयी | मैंने सफर को और काम्दीन बनाने के लिए उसकी कमर को अपने हाथों से थाम पीछे से ज़ोरदार धक्कों की बारिश सी की कर डाली थी जिससे अब उसकी चुत के चीथड़े उड़ते लग रहे थे | आखिर चरम सीमा पर हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर कांपते हुए थाम लिया और अचनक अपने कामरसों को छोड़ते हुए गीले हो चले | उस पल के बाद मैंने वहाँ पहाड़ों में खूबसूरत पल उसी लड़की के साथ बताये प्यार के परमाण पर चढ़ते हुए |