भीगे माहोल में सेक्स का सौदा

नमस्कार दोस्तों,

मेरा नाम विकास है और मैं आप सभी को अपनी सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसमें मैंने एक लड़की के अकेले में होने का अच्छा – खाशा फाईदा उठाय और उसके बदन के साथ खूब मस्त में खिलवाड़ करते हुए सुके चुत को मस्त – मौला होकर पेला | दोस्तों मैं यह तो नहीं जानता आता की वो लड़की कौन है पर हां आज भी मैं उसकी चुत के स्वाद को पहचान सकता हूँ | दोस्तों एक दिन जब मैं घर को जा रहा था तो रास्ते में तूफ़ान आ गया और तेज अन्धादुन्ध बारिश हो रही थी जिमें मैंने एक लड़की को कोने में बैठे हुए देखा | दोस्तों उसका पूरा बदन भीगा हुआ था और उसके चुचों माने मुझे नंगे दिख रहे थे | मेरा मन अब सब क्चुह भूलकर उस लड़की के दुद को पीने का कर रहा था |


वो लड़की किसी कैसे भी अपने घर में पहुंचना चाहती थी और इस बारिश के कारण वो बहुत ज्यादा देरी में पड़ती जा राइ थी | अब मैंने भी उससे इस आपातकालीन में महल में सीढ़ी बात की और कहा की अगर वो मेरा कहा मने तो मैं पीछे से शोर्टकट रास्ते से से उसे उसके घर तक कुछ ही देर में पहुंचा सकता हूँ . . उसने जब मेरी मांग पूछी तो मैंने कह दिया की मुझे उसके साथ इस भीगी बारिश में सेक्स करना है जिसपर उसने मुझे उसी वक्त गाली बकती और मैं शर्म के मारे वहाँ से जाने लगा | मेरे जाने पर उसे अपनी स्तिथि समझ आये और उसने मुझे फिर बुलाया और जल्दी चुदाई को खतम कर उसे घर पहुंचाने की बता की | अब सारा खेल मेरे हाथ में आ चूका था और खुशी मन से उसके साथ अपनी प्यास को भुजा सकता था |

मैं बा फ़ौरन ही वहाँ उस एपीचे के खंडरों में ले गया और उसकी बाहों को सहलाने लगा जिससे वो गरम होने लगी और शर्ट को खोल उसके गीले चुचों को बाहर निकाल लिया और उन्हें हाथ से मसलते हुए चूसने लगा | उसको दुदों की तो बाद और स्वाद दोनों ही निराली थी | उसने भी अब चुदाई को ज़बरदस्ती ना दर्शाते हुए मेरा सहयोग कारण ही सही समझा और अपने हाथ को मेरे सीने पर मसलने लगी और मेरी गीली चाटी पर बारिश की बूंदों को पीने लगी | मैंने अब उसे चुमते हुए उसके होठों को को भी अपने होठों तले रगड़ना शुरू कर दिया | कुछ ही देर में मैंने अपनी पैंट को खोल दिया और उसकी भी गीली पैंट को उतरा अपने सामने नंगी कर दिया | उसका भीगा गद्रिला बंद देखें लायक था और उस चुदेली मूरत के लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार था |

मैंने भी उसकी चुत के उप्पर ऊँगली को मसलते हुए अपनी उँगलियों को नंगी भीगी चुत में आगे – पीछे करने लगा वो भी मेरी लंड को अपने मुलायम हाथ में मसल रही थी | अब जब मेरा मन उसकी चुत को चोदने के लिए बेसब्र होने लगा तो मैंने उसे वहीँ झुकाते हुए चूत पर रगड़ने लगा और कुछ ही देर में मस्त वाले धक्के लगाने लगा | ताजुक बात तो यह हो चली की उसे मेरे लंड के धक्को पर दर्द नहीं हो रहा था | शायद उसकी भीगी हो चुकी चुत में मेरा लंड बड़े आराम से फिसल रहा था जिसमें बस कामवासना का मज़ा था और कोई दर्द नहीं | मैं अपने लंड को तेज़ी से अपना लंड अन्दर - बाहर करने लगा और वो भी जवाब में उसकी तेज सिसकियाँ निकल रहीं थी | मैं इसी तरह उसकी चुत चुत २० मिनट तक चोदते हुए भीगे माहोल में झड गया और फिर उसकी चुत की मालिश साथ समे बारिश के पानी को चाटने लगा |