आज मैं आपको अपने बहुत ही करीबी विधवा आंटी की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिन्होंने अपने जवान पति को खोने के बाद मेरे लंड को ही अपना हमसफ़र बनाया | मैं बहुत छोटा था तब उन आंटी की शादी हुई थी और आंटी मुझे अपने बच्चे की तरह ही मानती थी | मैं २ सालों के बाद जब अपने कॉलेज की पढाई कर लौटा तो आंटी मुझे देखती ही रह गयी क्यूंकि मैं बहुत जवान हो चूका था पर आंटी भी अब तक उतनी जवान और मस्त - मौला थी जैसी की वो मेरे बचपन के समय में थी | दुःख कहो या मज़े की बात यह थी की आंटी के पते एक दुर्घटना में चल बसे थे जिसके कारण आंटी ने मुझे अकेलेपन को दूर करने के लिए कुछ दिनों अपने घर में बिताने को कहा |
मैं आंटी के सतह ही अब खूब बातें किया करता और हम साथ रे रहे थे | आंटी ने भी अब मुझे धीर – धीरे अपने अंगों जैसे की कभी चूहों के गलियारे तो कभी अधनंगे चुचों को दिखाकर उत्तेजित कारण शुरू कर दिया था जिससे मैंने एक दिन आंटी को यूँ ही देखते हुए बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया | आंटी ने मुझे नहीं टोका बल्कि अपने चेहरे पर स्माईल लाते हुए सहयोग करने लगी | हम अब एक – दूसरे को मस्त में सहयोग करते हुए होठों को चूसने लगे | मैंने आंटी के ब्लाउस के उप्पर से ही चुचों को दबाते हुए उनके पेटीकोट खोल दिया और चुचों को दबाते हुए चूसा अब उन्हें अपने सामने वस्त्रहीन ही लिटा दिया और चढ़कर उनके चूचकों के साथ खेलते हुए उन्हें चूसने लगा |
मेरा लंड भी फौलादी हो चूका था इसीलिए मैंने आंटी की चुत को मसलने लगा उनकी चुत की फांकों लंड को निकलकर सुपाडे को बीच के सुराख में रगड़ते अंदर करना शुरू कर दिया | आंटी अब जोश में अपनी गांड को हिलाते हुए मेरे लंड को लेने जिसके साथ उनकी चुत पल में गीली हो गई और मैं उनकी चुत को पागलों की तरह चोद रहा था | आंटी कामवासना में उत्तजित होकर जोर – जोर से चिल्ला रही थी जिससे मेरा हौंसला उन्हें चोदने का बढ़ता ही जा रहा था | मैं उन्हें बेतहाशा धक्के दिए जा रहा था | मैंने आंटी को हर कोण में मुडाते हुए चोदा और आखिर में अपने लंड को मसलते हुए उनकी चुत पर ही झड गया |
आंटी इतने सालों बाद चुद रही थी तो उन्होंने अपनी गांड को उठाकर दूसरी पारी को खेलने के लिए कहा | मैंने फिर अपने लंड को तैयार करते हुए पीछे से अपने लंड को देना शुर कर दिया | मैंने साथ झटके भी दिए जा रहा था और आंटी अपने होंठों को चबा रही थी और बिल्ली की तरह रो भी रही थी | मेरी रफ़्तार अब उनकी गांड में बढती चली गयी और मैं बस उनकी गांड को चोदे जा रहा था जिसपर आंटी का पूरा बदन पसीनो में तर – बदर हो चूका था | आंटी की चुत की मलाई भी नीचे को टपक रही थी जिसे मैं चहक रहा था और चखते – चोदते ही मेरा दूसरी पारी वाला मुठ भी आधे घंटे बाद उनकी गांड में निकल गया | आंटी और मैं अब मेरी शादी के बाद भी यूँही चुदाई करते हैं |