नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको निहारिका की मस्तानी चुत की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसके सतह मैं हमेशा से ही अपनी रांड की तरह पेश आया | निहारिका के मस्त जवान औरत है और उसे अपने चूतडों का बोझ ना संभाला जाता था ना संभाला जाता है | मैं जब उससे मिला तो तो वो हमेशा से ही अपनी चुदाई की बात करती थी मुझसे पर मैं जानबुझ कर उससे तड़पाता रहता था हालांकि मैं उसके चूतडों को भींच लेता और कभी - कभी हम चुम्मा चाटी में इतने मग्न हो जाया करते की मैं उससे अपने उप्पर बैठकर आगे से उसका टॉप को उप्पर कर उसके गोरे – गोरे भारी चुचों को चूसना चालू हो जाया करता जिसपर निहारिका नीचे से मेरे लंड को पकड़ मसलने लगती | अब तो धीरे - धीरे मेरे भी सबर का बाँध टूट रहा था आखिर कोई कैसे इतना मस्त जवान मिल्फ़ को अपने पीछे बस यूँही नचा सकता था |
में निहारिका को अब बस चोदना चाहता था तभी मैंने एक दिन चोदना के लिए के होटल के एक कमरे को बुक कर लिया जहाँ अब मैंने उसके चुचों के माप को देखते ही पागल हो रहा था | मैंने अब उसे बिस्तर पर धकेलते हुए ज़ोरदार चुम्मी – चाटी करते हुए उसके योप को पूरा नीचे उतार दिया और उसके नंगे मोटे चुचों को बारी – बारी चूसने लगा | मैं उसके दोनों मम्मों के साथ चुसम – चुसाई करें के साथ पीछे हाथ मारते हुए उसके चूतडों को ज़ोरदार हथकंडो से मसलने लगा | मैंने अब उसकी पतली सी धारी वाली मट - मैली रंग की पैंटी को नीचे उतार अपनी उँगलियाँ चुत के मुख पर ही थी जिस पर उसकी वासना भरी शैतानी आदायें मेरे सामने आ चली |
अब मैंने अपने फौलादी बस चुत को चीरने के लिए बने लंड को और इन्तेज़ार उसके उठे हुए तंग बदन के सामने इन्तेज़ार नहीं करवा सकता था तभी मैंने उसकी चुत की फांकों में अपनी उँगलियाँ तेज़ी से अंदर बहार की जिसकी प्रतिक्रिया में उसकी कामुक सिस्कारियां सुन और मैं और गरम हो गया | मैंने अपने लंड को निकाला और उसकी चूत पर रगड़ने लगा और उसकी चुत में घुसते हुए रख कर जोरदार धक्का लगा दिया | शुरुआत में निहारिका को हलका – हल्का दर्द हुआ होगा ही के मैंने फिर अपने लंड के झटकों की बरसात कर दी | अनीता मज़े में झूमती हुई सिसकी ले रही थी और सहोग में अपनी गांड को मेरी तरफ धक्का लगाती गयी | मैंने उसकी चुदाई की में अपनी कमर को थामे आधे घंटे तक यूँही चुदाई करता चला गया और हम दोनों ज़ोरों से हांफ रहे थे |
हमारे धक्कों से अब तक बिस्तर भ कमज़ोर होकर चुन्न चिन्न्न्न्न . . की आवजें भरने लगा था | मुझे भी ना रहा गया और मैंने अपनी चरम सीमा पर पहुँचते हुए अपना सारा मुठ निहारिका के गोरे तन पर छोड़ दिया जिससे मैं अपने हाथों से उसके चुचों पर मलने लगा | मलते हुए अब मैं उसकी चुत में ऊँगली डाल रहा था और अजब की साँसों की जलन में उसे गाली भी दे रहा था | हमने १ घंटे के आराम के बाद फिर धीमी चुदाई की रफ़्तार पकड़ ली जिसे इस बार मैंने शीग्रस्खलितत ना होते हुए २ घंटे तक चलाया और इस बार के निकले अपने मुठ को उसके मुंह में ही छोड़ दिया | उस दीन के बाद तो मुझे भी उससे दुरी बर्दाश्त ना होने लगी और आज तलक मैं इस मिल्फ़ औरतकी रोज ही दर्दनाक चुदाई करता हूँ |