नमस्कार दोस्तों,
आज तक आप सभी ने लड़की से पेली बार मुलकात में कई सारी बातें की होंगी और किन्ही ने तो उन्हें चूम भी लिया होगा पर मैंने वो किया जो कोई करने की सोच भी नहीं सकता | मैंने पहली बार की मुलकात में नवीनाके साथ सेक्स किया और आज तक उसके साथ सेक्स करता हुआ आ रहा हूँ | दोस्तों मैं उसे जानता तो था पर मैंने उससे कभी बात नहीं की थी | एक दिन जब मैंने उससे पहली बार बात की तो यु समझो हमारी बातों की लगाम रुकी ही नहीं और हम बस बोलते – ही बोलते चले गए | उसे एक दम कसा हुआ टॉप पहना हुआ था जिसमें उसके निप्पल का माप तो उठकर मेरे सामने तह और मन में नए - नए कामुक विचार हर पल बन रहे थे |
उसदिन हम बातों – बातों में ही एक दूसरे को पसंद भी करने लगे | एक बार घूमते घूमते मैं उसे एक खाली मकान के पिछवाड़े की तरफ ले जहाँ किसी व्यक्ति का आना नहीं था | हम दोनों उसके पिछवाड़े में ही बैठ गए और ना जाने कब एक खामोशी का माहोल छा गया जब मैंने उसके हाथ पर अपने हताह को रख दिया | कुछ देर में मैंने उसके हाथको पकड़ सहलाते हुए उसे गरमकर रहा था और अचानक से उसे चूमने लगा | नवीना आपत्ति जताने के बजाये अब मेरा सहयोग करने लगी थी चुम्मों में | मैंने उसके चुचों को अपने हाथों में भर लिया और होठों को चूसते हुए उसके टॉप के अंदर हाथ डालने लगा | मैं अंदर हाथ घुमाते हुए उसके चुचों की गोलाईयों को नाप रहा था जिसे मुझे उतारते हुए समय ना लगा |
वो शांत रही और उसने मुझे एक पल भी नहीं टोका | मैं उसके नंगे चुचों को पीता हुआ स्कर्ट को नीचे उतार दिया और निप्पलों को अपने होंठों के साथ खेल रहा था | मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल अब उसकी चुत को मसलते हुए गर्म किया | वो अब अपनी ही कामुक दुनिया में खो चुकी थी | वो शक्ल से और व्यहवार में बिलकुल सुन्न पढ़ती जा रही थी | मैंने नवीना को वहीँ हलके से लिटाते हुए उसकी चुत में ऊँगली अंदर करना चालू कर दिया जिससे उसकी चुत जल्दी ही मेरे सामने गीली हो गयी | मैंने मौका ना गंवाते हुए अपने लंड को निकाल बस उसकी चुत पर टिकाया और धीरे से धक्का मार डाला | लंड के अंदर घुसते हुए वो एक दम तड़प उठी और दर्द से चींखें भरने लगी | मेरे लंड ने उसकी चुत की फांकों ओ चीर दिया था |
उसकी चींखें सुन मेरे अंदर सहितां आ चला और मैंने इस बार धक्के ज़ोरदार कर दिए और दिए ही जा रहा था | वो दर्द से कराह रही थी क्यूंकि उसकी चुत के फंटने के कारण अब उसकी चुत से खून भी निकला रहा था | मैंने अब भी अपनी रफ़्तार को धीमा ना किया और बस चुत में बारी - बारी धक्के दिए जा रहा था | लगभग १५ मिनट बाद उसका दर्द भी गायब हुआ और वो सिसकियाँ भर अपने उंगलियों को चूस रही थी और देखते ही देखते मेरा मुठ भी निकल गया और निढाल होकर एक बार में ही शांत पड़ गया | उसकी चुत का हकदार मैं हो चला था और जब भी समय मिलाता है तब मारता हूँ |