नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको अपने कॉलेज की गज़ब की रंडी की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिस एकमा - क्रीडा की बातें और अनुभव दोनों मिएँ ही हद्द से ज्यादा दिलचस्पी और उसी का मैंने फाईदा भी उठाया | वो दिखने तो मआल थी और अपने मोते – मोटे अंगों की भी अच्छी खासी कक्दार थी | मैंने दोस्तों कहीं और नहीं बल्कि अपने कॉलेज की छत पर ही उसके साथ सेक्स के मजेदार पलों को लुटा था | मुझे जब भी मौका मिलाता तो मैंने उस छिनाल के चुचों को दबाके उसके होठों को भी अपने होठों तले दबाता हुआ चूस जाया करता था | एक दिन मैंने उसे बहाना मारते हुए मुझे अकेले में कॉलेज के के पीछे को मिलने के लिया | वो सही समय में चुपके आ भी गयी जहाँ से मैंने उसे उप्पर को छत पर ले गया |
दोस्तों हम अब छत पर पहुँच चुके थे जहाँ किसी भी अवस्था में हम कोई भी नहीं देख सकता था | अब मेरा दिल उसके तन बदन को निचोड़ने के लिए बेताब होने लगा तो मैंने वहीँ छत पर उससे गले लगते हुए होठों को के रस को चुसे जा रहा था और बड़े मस्त तरीके से उसके उसके चुचों को दबाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी | वो अच्छी खासी आसमान पर छड चुकी थी और अब उसे वासना के आसमान से नीचे उतरने का कतई भी मन ना था | मैंने भी सही समय का अंदाज़ लगते हुए उसकी कॉलेज की पहनी हुई कुर्ती और सलवार को खोलते हुआ उसके नंगे चुचों को मुंह में भरते हुए पीने लगा | उसकी तेज सिसकियाँ मुझे तेज़ी और जोर बरतने पर अंदर से जोर दे रही थीं |
मैंने चुमते अब उसकी काली पैंटी को उतार अपने प्रति बिलकुल नंगी कर दिया उसकी चुत में उँगलियाँ करने लगा | मैं अब बड़े ज़ोरदार तरीके से उसकी चुत में उँगलियाँ बड़ी रफ़्तार से आगे – पीछे कर रहा था की | मैंने उस जोश में अब अपने लंड की आगमन किया और चुत पर लंड को टिकाकर उसकी चुत में अंदर देते हुए धक्के देने लगा | मैं अब पागलों की तरह जैसे उसकी चुत को चोद रहा था वो गंदे दर्द से गुजर रही थी | मैंने उस रंडी की चींखों की परवाह ना करते हुए बस अपना सारा ध्यान उसकी चुत चोदने में लगा दिया | थोड़ी ही देर बाद उसका दर्द भी गायब हो गया और वो भी चुदाई के मज़े लेने लगी |
अब वो ज़ोरों से चुदने के लिए अपनी गांड को मटका रही थी | मैंने भी मानो अपनी सारे वासना भरी आग को उसकी चुत को चोदने में ही निकाल दिया था | इसी तरह चुदाई के चलते खुले सफर में मैंने अपनी लंड के मुठ की पिचकारी उसी बदन के उप्पर छोड़ दी और पीर वहीँ उसके उप्पर लेट गया | हमारी चुद्याई का अंत तो हो चूका था पर वो वासना भरा एहसास हम दोनों के मन में अभी भी जीवित था | हम अभी भी चुम्मा – चाटी करते हुए एक दूसरे एक गुप्त अंगों की मालिश कर रहे थे |वो रंडी को मैंने पाने कॉलेज के ३ वर्षों के अंदर बिलकुल चोदते हुए देरी रंडका बना दिया था |