रसीली छमिया की मारी खेत में

नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको अपने गॉंव की मस्त - मैला छमिया की चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ और मुझे उम्मीद है आपको इसकी चुद्याई की मन में नयी कामवासना की चिंगारियों की बढ़ा देगी | दोस्तों मैं अक्सर ही जब गॉंव जाता था और मेरे पास लड़कियों की कमी नहीं होती थी क्यूंकि मैं उनके लिए शेरी नवाब तह और उका चाहिता था | मुझे सबसे ज्यादा पसंद तो अनुषा थी जो लाजवाब माल थी | उसके जैसी मस्त चूतडों वाली लड़कियां तो आजकल शहर में भी नहीं मिलती | मैं पहले से ही उसके साथ काफी बार शारीरिक सम्बन्ध में खो चूका था और उसे अपनी मेहबुबा बना चूका था | अब मैं जवानी की अच्छी खासी सीढियाँ चढ रहा था जहाँ मैं उसकी बिना चुदायी किये नहीं रह सकता इसीलिए मैंने उसकी इस बार गॉंव में चुदाई को ठोकने का निश्चय कर लिया |


मैं उससे मिलते ही कहीं अकेले में चलने को कहा सो वो मुझे अपने सतह दूर के खाली पड़े कहते में ले चली जहाँ उतनी सुबह – सुबह कोई नहीं आ सकता था | हम दोनों के थोबड़े पर इतने दिनों बाद हवस ली लालसा टपक रही थी | मैं अब तक उसे पानी बाहों में लेटे हुए आहोश में लपेट चूका था | उसके बदन की गर्मी मेरे उप्पर चढ़ते हुए मैंने उसके चुचों को भींचते हुए उसके होठों को अपने होठों की कैद में लिया जिससे और उसके गीले होठों को जमकर चुसना शुरू कर दिया और धीरे – धीरे कुछ देर में उसकी कुर्ती और सलवार को उतार दिया वही बाजु में गिरा दिया | मैं उसके चुचों को दबाते हुए चूस रहा था इतना जोर आजमाता हुआ चला गया की उसकी सिस्कारियां छूट रही थीं |

मैं अब वहीँ नीचे लिटाकर उसकी पैंटी को नीचे कर दिया और उसकी उसकी चुत में अपनी उँगलियों घुसेड़ने लगा जिससे वो बेदर्दी में तड़पने लगी और मेरा और हौंसला बढ़ता चल गया | मैं उसके उप्पर अब चढ लेट गया अपने लंड के सुपाडे उसकी चुत पर टिकाते हुए अंदर देने लगा साथ ही जोश – जोश में उसके चूतडों पर भी थप्पड़ पेल रहा था | मैंने उसकी चुत को आज फाड़ डालने के मुड में आ चूका था | मैं उसके बदन के साथ और बेरहमीपना करते हुए उसकी गांड भी पेलने पर उतारू हो चला | मैं उसे वहीँ झुका दिया और पीछे से उसकी गांड में अपने लंड को टीकाकार उसकी गांड में अपने लंड को दौडाने लगा |

उसके गांड में डालने का उसकी चुत को चोदने से ज्यादा आ रहा था | हम दोनों जोश में एक दूसरे से टकराटे और अंगों के मेल कहनो पर गन्दी – गन्दी गालियां बक रही थी | उस वासना में डूबे हुए मन में नयी - नयी जलन सी लग रही थी जिसपर मेरा आक्रोश बहार उसकी चुत में तेज के धक्कों के रूप में निकल रहा था | हमें चुदाई की रासलीला रचाते हुए सुबह से शाम हो चली थी और हम पसीनों में पुरे लथ हो चुके थे | अचानक मेरे मुठ ने सारी रासलीला का अंत कर डाला और उसकी चुत की धारा को भी बहने में समय नहीं लगा | मैं जब तक गॉंव में और जभी भी जाता हूँ उसकी चुत को इसी तरह चोदा करता हूँ |