नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको अपने अंकल की नाबालिग बेटी की कमसीन चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ जो काफी कुछ समय से मेरे दिल के वीराने में गुप्त बनी हुई थी | दोस्तों में सेक्स क्रिया का एक नंबर का भूका हूँ और सह बताऊँ तो मुझे किसी जवान लड़की के साथ नाबालिग लड़कियां सेक्स करने के लिए उपयुक्त नज़र आती है | उनके उभरते हुए पेनें चुचे जैसे मुझे दीवाना ही कर देते हैं | उनकी चुत का वो छोटा सा छेद जिसमें हमारा लंड जाकर उनकी चुत में जवानी की दस्तक देता है | मुझे हमेशा से छोटी उम्र की लड़कियों में दिलचस्पी रही है और मेरी यह दिलचस्पी कब ना जाने के असल के हवसीपाने में बदल गयी पता ही नहीं चला | मेरी अंकल की एक बेटी थी जो भले ही उम्र में मुझसे छोटी थी पर वो दिखने में कुछ ज्यादा ही खुबसूरत थी और उसके गुप्त अंग भी अच्छे – खासे खिल चुके थे |
वो लकड़ी सेक्स की बातों से बिलकुल ही अनजान थी जिक्सी फैयदा मैंने उठाया | दोस्तों उस दिन मैं कामुक फिल देखते हुए हस्तमैथुन कर रहा था | वो अचनक से मेरे घर में आ गयी क्यूंकि उसके घर पर कोई नहीं था | मैं शयद उस दिन उसे अपनी आहोश में लेने के लिए तड़पा जा रहा था | मैंने धीरे - धीरे उसे अंदर अपने कारीब बिठा लिया | मैं बातों - बातों में उसके साथ हलकी – फुल्की मस्ती करने के धीरे – धीरे उसके नरम चुचों तक भी पहुँच गया | मैं अब उसके अंगों को सहलाते हुए मज़ा ले रहा था और उसके टॉप को भी उतार दिया | मैं बैठकर उसके नंगे चुचों को मसलते हुए चूसने लगा जिसपर वो पागल सी होने लगी और आँखें बदन कर बस सिसकियाँ ले रही थी | मैंने अब कुछ ही देर मैंने उसके सभी कपड़ों को उतार डाला | मैंने उसे पूरी नंगी करबिस्तर पर लिटा दिया |
मैंने अब उस लड़की की चुत को अपने हाथों से रगडना चालू कर दिया और उसके कुछ देर बाद ही अपने लंड को निकाल उसकी टांगों के बीच चुत पर टिका दिया | मैंने हलके – हलके धक्के मारना शुरू कर दिया जिसपर उसे दर्द होने लगा जिसपर उसकी चींखें बहार नहीं निकल रही थी | मैंने अब उसके दर्द के की परवाह ना करते हुए उसे छोटे से कोमल छेद में अपने भारी – भारी झटके देना शुरू कर दिया | मैं उसकी चुत को बस अब गंदे तरीके चोदे जा रहा था रहा था की उसकी चुत से खून निकलने लगा | उससे ज्यादा दर्द होता तो मैंने उससे चुप कर मन लिया और कुछ दस मिनट बाद फिर चालु किया अब उससे कम दर्द हो रहा था जिसपर उसकी सिस्कारियां निकल रही थी |
अब वो लड़की शान्ति से मेरे झटकों को लिए जा रही थी और मैं अपने में उसी छोटी सी कोमल चुदाई के भाव मस्त में खोये हुए थे | इसी तरह अब मैंने अपने झटकों का की तेज़ी को सिमित कर दिया जिससे हम दोनों को बराबर आनंद मिल रहा तह और ताकि दर्द किसी को भी ना हो | हम दोनों ही ही मस्त वाली कराहरें लेते हुए चुदाई की मस्त मौला रासलीला में खोये हुए थे की मेरे मुठ ने निकलकर उसकी चुत को एक बार में पूरा गीला कर दिया |