नमस्कार दोस्तों,
आज मैं दोस्तों अपने एक दोस्त की बहन की जवानी की बेसुध होकर लूटने की कहानी सुनाने जा रहा हूँ और ज़ाहिर तौर पार आपको यहे मेरी कामुक कहानी खूब ही पसंद आएगी | दोस्तों मैं अक्सर ही अपने दोस्त के घर पर उसे नीचे घूमने के लिए बुलाने के लिए आया करता था | कभियो – कभी मेरी नज़र उसकी बहन पर पड़ जाती जोकि अभूत ही छोटे कपडे पहन कर घर में रहा करती थी | अब तो मैंने अपने दोस्त को बुलाना एक बस एक बहाना बना लिया था और बस उसकी बहन को ही देखने के लोइए आया करता था और एक दिन मुझे इसी बहाने अच्छा – ख़ासा प्रसाद भी मिल गया |
एक दिन हुआ जब मैं अपने दोस्त के घर पहुँच तो उसकी बहन ने दरवाज़ा खोला और मुझे नादर बुला लिया | आज तो उसके बदन पार्क हद एहा कपडों ने मुझे तंग का कर ही दिया था | उसने छोटा - सा टॉप पहना हुआ और नीचे से छोटी सी कसरत पहनी हुई थी जिसमें से उसकी नंगी - नंगी गोरी टांगें मुझे उत्तेजित कर रही थी | वो अचानक मेरे करीब आकार मेरी आँखों में आँखों डाल कहने लगी,
क्यूँ मुझे हमेशा अपनी इन तीखी नज़रों से देखता है . . तुझे खुद को भी नहीं पता यह तेरी नज़रें मुझे किस कदर चुब्ती है . . ! !
जिसपर मैंने भी कहा,
जब यह कुवा इस प्यासे से अछूता रहगा तब मैं तुझे यूँ ही ताकता रहूँगा . .! !
मैंने अब समय ना गंवाटे हुए उसके हाथ को पकड़ते हुए अपने बाहों में लपेट लिया उसके होठों को चूसते हुए उसके चुचों को भींचना शुरू कर दिया | उसके टॉप भी उप्पर उठाने में मैंने डॉ ना लगाई क्यूंकि वैसे मेरे अंदर जल कामाग्नि ने मुझे अंदर से निचोड़ दिया था | मैंने उसके चुचों को चूसने लगा जिसपर उसे बहुत राहत मिल रही थी | मैं उसकी योनी को बिना चोदे नहीं रहने वाला था और अब तक मेरी आँखें भी उसके पुरे नंगे बदन को देखने ले लिए तरसी जा रही थी | मैंने उसकी स्कर्ट के साथ उसकी पैंटी फट से निकाल दी जिससे उसके बदन में झुरझुरी उठ पड़ी साथ ही मैंने उसकी चुत के उप्पर ही ऊँगली फिराने लगा |
अब वो मेरे सामने बिलकुल ही नंगी थी और मैंने उसे उसके ही बिस्तर पर लिटाते हुए जल्दी से उसकी दोनों टांगों को उठाते हुए उसकी नंगी गोरी - चिकनी चुत को मेरे लंड के झटकों से पेलना शुरू कर दिया और कभी ना थामने वाला जोश अपनि टांगों में बसा लिया | मेरे मोटे लंड के धक्कों के सामने अब उसकी चींख निकलने लगी | मैंने उसके दोनों टांगों को अब अपने कंधे पर रखा और मजेदार धक्कों से उसकी चुत में बरसात कर दी | वो अब चीखों के दर्द से नीचे आते हुई कासी हुई सिसकियाँ निकाल रही थी मेरे समर्थन में अपने चुचों को अपनी हथेली के बीच मसलकर मेरे मुंह के बीच ला जाती जिसपर मैं भी चुस्कियों का आनंद उठा लेता |
हमारा यह साफ अब चुदाई का लगभग १ घनते की सीमा को तय कर चूका तह और किसी के घर में आने का डर भी बनता जा रहा था | मैंने अब आखिरी के कुछ ज़ोरदार पलों में अपने मुठ को छोड़ने में देरी ना की और निढाल होकर होकर उसके गद्देदार बदन से लिपट गया |
आज मैं दोस्तों अपने एक दोस्त की बहन की जवानी की बेसुध होकर लूटने की कहानी सुनाने जा रहा हूँ और ज़ाहिर तौर पार आपको यहे मेरी कामुक कहानी खूब ही पसंद आएगी | दोस्तों मैं अक्सर ही अपने दोस्त के घर पर उसे नीचे घूमने के लिए बुलाने के लिए आया करता था | कभियो – कभी मेरी नज़र उसकी बहन पर पड़ जाती जोकि अभूत ही छोटे कपडे पहन कर घर में रहा करती थी | अब तो मैंने अपने दोस्त को बुलाना एक बस एक बहाना बना लिया था और बस उसकी बहन को ही देखने के लोइए आया करता था और एक दिन मुझे इसी बहाने अच्छा – ख़ासा प्रसाद भी मिल गया |
एक दिन हुआ जब मैं अपने दोस्त के घर पहुँच तो उसकी बहन ने दरवाज़ा खोला और मुझे नादर बुला लिया | आज तो उसके बदन पार्क हद एहा कपडों ने मुझे तंग का कर ही दिया था | उसने छोटा - सा टॉप पहना हुआ और नीचे से छोटी सी कसरत पहनी हुई थी जिसमें से उसकी नंगी - नंगी गोरी टांगें मुझे उत्तेजित कर रही थी | वो अचानक मेरे करीब आकार मेरी आँखों में आँखों डाल कहने लगी,
क्यूँ मुझे हमेशा अपनी इन तीखी नज़रों से देखता है . . तुझे खुद को भी नहीं पता यह तेरी नज़रें मुझे किस कदर चुब्ती है . . ! !
जिसपर मैंने भी कहा,
जब यह कुवा इस प्यासे से अछूता रहगा तब मैं तुझे यूँ ही ताकता रहूँगा . .! !
मैंने अब समय ना गंवाटे हुए उसके हाथ को पकड़ते हुए अपने बाहों में लपेट लिया उसके होठों को चूसते हुए उसके चुचों को भींचना शुरू कर दिया | उसके टॉप भी उप्पर उठाने में मैंने डॉ ना लगाई क्यूंकि वैसे मेरे अंदर जल कामाग्नि ने मुझे अंदर से निचोड़ दिया था | मैंने उसके चुचों को चूसने लगा जिसपर उसे बहुत राहत मिल रही थी | मैं उसकी योनी को बिना चोदे नहीं रहने वाला था और अब तक मेरी आँखें भी उसके पुरे नंगे बदन को देखने ले लिए तरसी जा रही थी | मैंने उसकी स्कर्ट के साथ उसकी पैंटी फट से निकाल दी जिससे उसके बदन में झुरझुरी उठ पड़ी साथ ही मैंने उसकी चुत के उप्पर ही ऊँगली फिराने लगा |
अब वो मेरे सामने बिलकुल ही नंगी थी और मैंने उसे उसके ही बिस्तर पर लिटाते हुए जल्दी से उसकी दोनों टांगों को उठाते हुए उसकी नंगी गोरी - चिकनी चुत को मेरे लंड के झटकों से पेलना शुरू कर दिया और कभी ना थामने वाला जोश अपनि टांगों में बसा लिया | मेरे मोटे लंड के धक्कों के सामने अब उसकी चींख निकलने लगी | मैंने उसके दोनों टांगों को अब अपने कंधे पर रखा और मजेदार धक्कों से उसकी चुत में बरसात कर दी | वो अब चीखों के दर्द से नीचे आते हुई कासी हुई सिसकियाँ निकाल रही थी मेरे समर्थन में अपने चुचों को अपनी हथेली के बीच मसलकर मेरे मुंह के बीच ला जाती जिसपर मैं भी चुस्कियों का आनंद उठा लेता |
हमारा यह साफ अब चुदाई का लगभग १ घनते की सीमा को तय कर चूका तह और किसी के घर में आने का डर भी बनता जा रहा था | मैंने अब आखिरी के कुछ ज़ोरदार पलों में अपने मुठ को छोड़ने में देरी ना की और निढाल होकर होकर उसके गद्देदार बदन से लिपट गया |