नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको अपनी चचेरी बहन की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसके साथ मैंने बरसों पहले कामुक संबंद जोड़े रखें थे | हमारे सम्बन्ध के बारे में किसी को भी खबर नहीं थी क्यूंकि हम हमेशा कहीं चुप – छुप कर यह सब किया करते थे | दोस्तों मेरी चचेरी बहन ही एक रंडी के सुख का काम करने लगी थी | मैंने यूँ कई लड़कियों की चुत को पेला था पर आखिरकार वो सुख और आनंद मुझे अपनी चचेरी बहन की चुत चुदाई के साथ मिला करता था | दोस्तों मैं आपको अपनी हाल ही में हुई चुद्याई के बारे बताने जा रह हूँ जब मैं उससे खाशतौर पर मिलने के लिए उसके शहर गया हुआ था | वो नौकरी करती थी इसीलिए उसने अपना कमरा लिया हुआ था जहाँ वो अकेली ही रहा करती थी |
हम अकेलेपन में खूब मज़े लिया करते थे और आज भी ऐसा ही कुछ अवसर मिल गया था | उसने मेरा स्वागत पूरी नंगी होकर किया जिससे पहली मुलाकात में मेरे लंड ने सलामी दे दी | मैं अब आगे बढते हुए उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसे बिस्तर पर उठा ले और वहीँ नर्मिले होठों को चूसते हुए उसके मम्मों को मसलते हुए चूसा | मैंने उसकी पुरानी यादगार चुत मसलते हुए अपने लंड के नीचे ले आया | अब मैंने उसकी चुत में लंड को घुसेड़ते हुए बेहिसाब झटके देता ही चला गया | मैं अपनी चचेरी बहन की एक घनटे तक जोरदार चुदायी करता हुआ पूरी तरह से थक चूका था और उसकी चुत को चाटते हुए मैं घोड़ी बना दिया |
जब वो घोड़ी बन गयी तो उसकी नंगी गांड मेरे सामने आ चुकी थी जिसपर मैं अपनी जीभ फिरान इ से खुद को रोक नहीं पाया उसकी गांड में ऊँगली कि गिनती बढाते हुए अंदर धंसाने लगा | वो दर्द से चिल्ला रही थी पर मैं मैंने उसकी एक ना सुनी | मैंने गिनती बढाते हुए उसकी गांड में लगभग अपनी ऊँगली को थूक लगाते हुए डाल आगे – पीछे करने लगा | मैंने फिर अपने लंड को बहार निकाल ओर उसका सुपाडे पर उसकी चुत कि मलाई लगाते हुए उसकी गांड पर टिका दिया | मैंने तभी एक दम उसके जोरदार धक्का मारा जिससे मेरा लंड एक बार में उसकी गांड को चीरता हुआ अंदर को बढ़ चला |
मेरी चचेरी बहन दर्द से चिल्ला रही थी और इस बार वो चिल्लाते पर मैंने हर बार की तरह उसके दर्द को नज़रंदाज़ कर दिया क्यूंकि मुझे मालुम था की दर्द के बाद हिया स्ली कामुक मज़ा आता है | कुछ देर इसी तरह दादर भरी चुदाई चलती चली क्यूंकि मैं काफी समय बाद उसकी गांड को चोद रहा था | धीरे – धीर जब उसकी गांड को मेरे घुसते हुए लंड की आदत हो चली तो उसका दर्द भी हवा हो चला और वो अब तो खुद ही सीत्कारें लेती हुई अपनी गांड को कसके चोदने लिए मुझपर जोर – जोर से चिलला रही थी | मैंने अपनी चचेरी बहन की गांड को भी आधे घंटे तक चोदा और आकहिर में निढाल होते हुए उसे अपने मुठ से निहला दिया और उसकी चुत के पानी को पिता हुआ वहीं लेट गया |